गुरुवार, 11 दिसंबर 2008

आम लोगों का ब्रम्हाश्त्र है सूचना का अधिकार

रामजोशी

सूचना के अधिकार को मैनें निजी तौर पर अपने लिए इस्तेमाल नहीं किया है या यूं कह सकते हैं कि दुनियादारी के संघर्ष से अभी मेरा पाला नहीं पड़ा है। मगर इस कानून के बारे में मैनें बताया बहुत लोगों को है। कई जगह तो मैनें अपने साथियों के लिए इसका इस्तेमाल किया है। मजेदार बात यह है कि उसका असर भी तुरतपफुरत देखने को मिला।
मेरे एक मित्र सुजीत वाजपेयी को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में उन्हें अपने एक मकान की रजिस्ट्री करानी थी। पत्रकार होने के नाते हमें यह घमंड का था कि हमारा काम यूं ही हो जाएगा। लेकिन जब जीडीए के बाबुओं ने हमें नाच नचाया तो पत्रकारिता का सारा भूत ही उतर गया। काम भी न होय और उस पर ईमानदारी का चस्पा। सचिव से लेकर पुलिस इंस्पेक्टर तक ही सिफारिश लगवा डाली, मगर बाबू की बाबूगिरी के आगे सारे पानी भरते नजर आए। काफी भागदौड़ के बाद रजिस्ट्री हो गई। हमने चैन की सांस ली।
रजिस्ट्री के बाद पता चला कि हमने मकान की कुल कीमत से 32 हजार रूपये अधिक जमा करा दिए हैं। यह भी बाबू की ही करामात थी, क्योंकि कुल रकम का उस हिसाब बाबू ने खुद कई बार लगाया था। बाबू हमसे यहां भी पैसे ऐंठना चाहता था। अब बात आई ज्यादा जमा हो गई रकम को वापस लेने की। इस पर भी बाबू ने कई चक्कर कटवाए।
आखिर मैनें थक हारकर सूचना के अधिकार के तहत एक आवेदन तैयार किया और उक्त रकम के बारे में पूरी जानकारी मांग डाली। आरटीआई डालने के तीन दिन बाद बाबू का फोन आता है- भाई साहब आपने यह क्या किया। मैं तो खुद ही आपका चैक बनवाने के लिए भागदौड़ कर रहा था। आखिर में ठीक 15 दिन के बाद वाजपेयी जी को उनका चैक मिल गया। इसी तरह मैनें अपने एक मित्र को उनके पिता के लिए इलाज के दौरान एक अस्पताल द्वारा की गई लापरवाही के बारे में लापरवाही डलवाई। वह भी अपने संघर्ष में काफी हद तक कामयाब हो चुके हैं।

(लेखक दिल्ली प्रेस में उपसंपादक है)

2 टिप्‍पणियां:

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत ही उपयोगी जानकारी है।लेकिन एक निवेदन करना चाहूँगा।कृपया पाठको की सुविधा के लिए यह बता देते कि इस "सूचना का अधिकार" प्राप्त करने के लिए कहाँ और किस पते पर शिकायत करनी चाहिए। तो बेहतर होता।धन्यवाद।

भागीरथ ने कहा…

paramjeet ji
soochna ka adhikar poore desh ke logon ko kanooni roop se hasil hai. iske liye shikayat ki jaroorat nahin hoti. jis vibhag se soochna leni ho uske pio ko rti aavedan 10 rs. ki fees ke saath dena hota hai. 30 din me use mangi gayi soochna deni hogi nahin to 250 rs. pratodin ke hisab se uski salary kat sakti hai.