शनिवार, 18 सितंबर 2010

आरटीआई ने बन्द करवाया अवैध् होटल

लोनावाला के रहने वाले किशोर जैन के घर के सामने उनके पड़ोसी ने होटल खोल लिया, जब किशोर जैन ने लोनावाला नगर पालिका से आरटीआई तहत यह पूछा कि एक आवासिय कॉलोनी में होटल खोलने की इज़ाजत किसने और कैसे दी तो उन्हें पता चला कि होटल गैरकानूनी तरीके से चल रहा। आरटीआई के तहत मिली इस सूचना के आधार पर उन्होंने नगर पालिका से होटल बन्द कराने के लिए शिकायत की पर उनकी शिकायत पर कोई कार्यवाई नहीं की गई। इसके बाद किशोर जैन अदालत में गये और पिछले महीने  मुम्बई उच्च न्यायालय के आदेश पर गैरकानूनी तरीके से चल रहे होटल को सील कर दिया गया।
सोना चादी  के कारोबारी किशोर जैन की दुकान मुम्बई के बान्द्रा इलाके में है। उन्होंने 1988 में मुम्बई पुने हाईवे पर लोनावाला में जमीन  खरीद  कर घर बनाया। मकसद था शहर की शोरगुल से दूर एक ऐसी जगह हो जहां आराम और शान्ति से रहा जा सके। लेकिन वर्ष 2007 में उनका यह घर उनके लिए अशान्ति और टेंशन का कारण बन गया। उनके घर के सामने वाले बंगले में एक होटल खुल गया, जिसके कारण वहां रात दिन शोरगुल होने लगा। साथ ही बंगले में होटल के हिसाब से गैरकानूनी निर्मण भी करा लिया गया। किशोर जैन को आश्चर्य हुआ कि एक आवासिय कॉलोनी में होटल खोलने की इजा़जत कैसे मिल गई। उन्होंने इसका पता लगाने के लिए फरवरी 2007 में आरटीआई के तहत लोनावाला नगर पालिका से इस सम्बंध् में जानकारी मांगी। जो सूचना उन्हें दी गई उससे पता चला कि नगर पालिका ने उस इलाके में होटल खोलने के लिए किसी को कोई इज़ाजत कभी नहीं दी है।

आरटीआई के तहत मिले इस जवाब के आधर पर उन्होंने होटल बन्द कराने तथा अवैध् निर्माण गिराने के लिए लोनावाला नगर पालिका को लिखित शिकायत की। उनकी शिकायत पर तो नगर पालिका की ओर से कोई कार्यवाई नहीं की गई लेकिन उन्हें धमकिया  जरूर मिलने लगी। दूसरी तरफ होटल के मालिक ने नगर पालिका के अधिकारियो  की मिलीभगत से कार्यवाई से पहले ही कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया। कोर्ट के स्टे को हटाने के लिए नगर पालिका की ओर से जब कोई कार्यवाई नहीं की गई तो परेशान होकर किशोर जैन भी अदालत में एक पार्टी बन गये। जुलाई 2007 में बड़गांव कोर्ट ने स्टे हटाते हुए अपने आदेश् में कहा की वो किसी भी तरह के अवैध् निर्माण को संरक्षण नहीं दे सकते है इसलिए नगर पालिका अवैध् निर्माण गिरा सकती है और आग कार्यवाई कर सकती है। नगर पालिका ने कोर्ट के आदेश के बावजूद  भी कोई कार्यवाई नहीं की।
इस बीच होटल मालिक ने स्थानीय कोर्ट के आदेश के खिलाफ  पुणे के ज़िला कोर्ट में चले गये। पुणे कोर्ट ने जुलाई 2008 में बड़गांव कोर्ट के आदेश को सही मानते हुए लोनावाला नगर निगम के होटल बन्द कराने और अवैध् निर्माण गिराने की कार्यवाई पर रोक लगाने से मना कर दिया। इसके बाद भी न सिर्फ होटल लगातार चलता रहा, बल्कि  उसका विस्तार भी होने लगा। किशोर जैन के बगल के एक और बंगले में भी होटल खुल गया। साथ ही उन्हें लगातार परेशान भी किया जाने लगा। उनके घर की स्ट्रॉम लाइन तथा नालियां बन्द कर दी गई। होटल में आने वाले ग्राहकों की गाड़ियां उनके घर के सामने पार्क कर दी जाती थी। होटल के एसी का निकास उनके घर की ओर कर दिया गया जिससे एसी से निकलने वाली प्रदूषित गर्म गैस सीधे    उनके घर में जाती थी। किशोर जैन ने बताया कि ``ये सब इसलिए किया जा रहा था कि मैं घर बेच कर चला जाऊं। लेकिन जब होटल मालिक अपने इस मकसद में सफल नहीं हुआ तो एक दिन मेरे घर पर 15-20 गुण्डे बाइक से आये और मुझे धमकी  दिया कि मैंने जो शिकायत की है वो वापस ले लूं और चुपचाप यहां से चला जाऊं। मैंने इसकी शिकायत करने थाने गया तो पहले तो मेरी एफआईआर ही नहीं दर्ज किया जा रहा था। काफी कहा सुनी के बाद  पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर लिया लेकिन उस पर कोई कार्यवाई नहीं की गई। इस घटना के बाद मैंने तय किया कि अब तो इस लड़ाई को इसके सही अंजाम तक पहुंचा कर ही रहुंगा।´´
कोर्ट के आदेश के बावजूद  भी लोनावाला नगर पालिका होटल बन्द कराने को तैयार नहीं था। निगम के कुछ अधिकारी  पैसा लेकर मामले  को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रहे थे। नगर पालिका के अधिकारियो  के रवैये से दुखी हो कर किशोर जैन ने 16 जून 2008 को मुम्बई उच्च न्यायालय में एक रिट  दायर की। उच्च न्यायालय ने 13 अप्रैल 2009 को लोनोवाला नगर पालिका को आदेश दिया कि बंगले में किये गये अवैध् निर्माण को गिरा कर होटल सील कर दिया जाए और अगली सुनावई में इसकी कार्यवाई रिपोर्ट कोर्ट के समने पेश की जाए। नगर पालिका के अधिकारियो  ने अगली  सुनवाई में कोर्ट में झूठा शपथ  पत्र दायर कर दिया कि होटल को सील किया जा चुका है। इसके बाद किशोर जैन ने अपने कुछ दोस्तों को होटल में रहने के लिए भेजा और सबूत इकटठा  किया कि होटल चल रहा है और इन सबूतों को उच्च न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने 28 जून 2010 को नगर पालिका के मुख्य  अधिकारी के खिलाफ  अवमानना का नोटिस जारी किया। नोटिस के जवाब में लोनावाला नगर पालिका के मुख्य  अधिकारी  योगेश गोड़से ने यह माना कि होटल मालिक ने उन्हें झूठी सूचना दी थी कि होटल बन्द किया जा  चुका है और नगर पालिका के  अधिकारी से गलती हुई कि उन्होंने इसकी जांच किये बिना ही अदालत में शपथ  पत्र दाखिल कर दिया। लोनावाला नगर पालिका के इस रवैये को गम्भीरता से लेते हुए न्यायालय ने पिछले महीने अपने आदेश में बहुत शक्त लहजे में कहा कि राज्य सरकार को चाहिए की लोनावाला नगर पालिका को बन्द कर दे क्योंकि यह संस्था कानून के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है। साथ ही नगर पालिका को आदेश दिया कि होटल को तुरंत  बन्द कराये और जो भी अवैध् निर्माण किया गया है उसे गिराए। न्यायालय ने नगर पालिका को यह भी आदेश दिया है कि वो यह सुनिश्चित करे कि आवासीय  कॉलोनी में चल रही सभी तरह की व्यावसायिक गतिबिधिया पूरी तरह से बन्द की जाए। उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद निगम तुरन्त हरकत में आया और होटल के गैरकानूनी हिस्से को गिरा कर उसे सील  कर दिया गया।
तीन सालों की कानूनी लड़ाई के बाद मिली इस सफलता का पूरा श्रेय किशोर जैन सूचना के अधिकार को देते है। उनका कहना है कि अगर आरटीआई नहीं होता तो शायद उन्हें ये पता ही नहीं चल पाता कि जो होटल उनके घर के सामने चल रहा था उसे नगर पालिका से इज़ाजत मिली  थी या नहीं। नगर पालिका के अधिकारी तो खुलेआम होटल मालिक का पक्ष ले रहे थें वो कभी भी मुझे कोई सूचना नहीं देते। ये तो आरटीआई का कमाल था कि वो मजबूर थे मेरे द्वारा मांगी गयी सूचनाएं देने के लिए।
किशोर जैन को मिली इस सफलता ने अब लोनावाला में गैरकानूनी रूप से चल रहे अन्य 13 होटलों को बन्द करने और उन्हें सील करने का रास्ता साफ कर दिया है।

2 टिप्‍पणियां:

Vivek Rastogi ने कहा…

पता नहीं हमारे भारत के सरकारी कर्मचारी कब भ्रष्टाचार में लिप्त होना बंद करेंगे, और कब तक भारतीय लोग इन्हें घूस देते रहेंगे।

चलिये आखिरकार ३ वर्ष बाद ही सही, विजय हुई। आरटीआई के साथ ही साथ किशोर जैन के हौसले की भी दाद देनी होगी।

Bimal Kumar Khemani ने कहा…

दोस्तों
समय आ गया है की अब हम लोगो को संघर्ष करना पडेगा
घुस लेने वालो और घुश देने वालो से भी तभी शायद कोई सुधार आ सके
आज सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह एवं भत्ते इतने अधिक होने के पश्चात भी उन्हें घुस खाने की भूख लगी रहती है
उनसे बेहतर और अधिक जिम्मेदारी से काम करने वाले व्यक्ति निजी सन्सथानो में इस ताकत पिपासुओ से काफी कम वेतन पर और अधिक इमानदारी से कार्य कर रहे है