गुरुवार, 31 जुलाई 2008

सूचना के अधिकार ने दिलाई पदोन्नति

उडीसा वन विकास निगम में सेक्सशनल सुपरवाईजर के पद पर पिछले सात सालों से कार्यरत गणपति बहरा का प्रमोशन नहीं हुआ था जबकि उनके कई जूनियरों को प्रमोशन दे दिया गया। हर बार प्रमोशन के वक्त उनकी वरिष्ठता और मेहनत की उपेक्षा की गई। उनकी कार्यप्रणाली और लगन में किसी तरह की कमी नहीं थी। अनेक अधिकारियों ने उनकी एसीआर की तारीफ करते हुए उनकी तरक्की की सिफारिश भी की थी लेकिन प्रमोशन समिति के कानों में इस सिफारियों का कोई असर नहीं हुआ।

विभाग के भीतर इस कदर भ्रष्टाचार और अन्याय को देखते हुए आरटीआई कार्यकर्ता आनंद सामल ने उनके पक्ष में आवाज उठाई और आरटीआई आवेदन से विभाग के लोक सूचना अधिकारी से इस संबंध में जवाब तलब किया। हद तो उस समय हो गई जब लोक सूचना अधिकारी ने आरटीआई आवेदन का कोई जवाब नहीं दिया। विभाग के इस रवैये को देखते हुए आवेदक आनंद ने 35 दिनों तक सूचना का इंतजार करने के बाद सीधे आयोग में इसकी शिकायत की। आरटीआई आवेदन में प्रमोशन की प्रक्रिया और समिति के सदस्यों के बारे में सूचनाएं मांगी गईं थीं।

आयोग में विभाग की शिकायत का असर हुआ और गणपति बहरा को तुरंत सेक्सशनल सुपरवाईजर से सब डिवीजन मैनेजर के पद पर नियुक्त कर दिया गया। इस प्रकार सूचना के अधिकार ने गणपति बहरा के साथ हो रहे अन्याय को खत्म करने में मदद की।

बुधवार, 30 जुलाई 2008

आरटीआई कार्यकर्ताओं की वार्षिक बैठक: एक रिपोर्ट

दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में 28 और 29 जुलाई को संपन्न हुई सूचना के अधिकार कार्यकर्ताओं की वार्षिक बैठक में केन्द्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली के संबंध में अनेक प्रकार की चिंताएं सामने आईं। देशभर के 21 राज्यों के करीब 150 आरटीआई कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने राज्यों के सूचना आयोग की कार्यप्रणाली का जिक्र किया और उन्हें सुधारने के लिए सुझाव दिए। पूरी बैठक में बहस का मुद्दा यह रहा कि क्या आयोग को सुधारने के लिए सीधी कारवाई का वक्त आ गया है? अरविंद केजरीवाल ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्रीय सूचना आयोग के खिलाफ सीधी कारवाई करने का वक्त आ गया क्योंकि आयोग को सुधारने के हमारे सभी प्रयास विफल हुए हैं। उन्होंने बताया कि सूचना आयुक्त पदमा बालासुब्रमण्यन ने अब तक किसी भी दोषी लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना नहीं लगाया है। शैलेश गांधी सहित कुछ कार्यकर्ताओं ने सीधी कारवाई से पहले आयोग को सुधारने के अन्य उपायों पर जोर दिया।

अनेक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाए कि सूचना आयोग ही सूचना के अधिकार के सफल कार्यान्वयन में सबसे बड़ी बाधा बन रहे हैं क्योंकि सूचना आयुक्त की आवेदकों की बजाय प्रशासन और सरकार से सहानुभूति है। छत्तीसगढ़ से आए कार्यकर्ताओं ने आयोग द्वारा लोक सूचना अधिकारी से रिश्वत लेने की बात कह आयोग को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि राज्य में आयोग पर राजनैतिक दबाब बहुत अधिक है और वहां प्रथम अपीलीय अधिकारी लगभग निष्क्रिय हो चके हैं। सूचना आयोग की कार्यप्रणाली के संदर्भ में अनेक राज्यों की तरफ से जो आंकड़े उपलब्ध कराए गए वह भी काफी चौंकाने वाले थे और आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे थे। मध्य प्रदेश से आई आरटीआई कार्यकर्ता रोल्ली शिवहरे ने बताया कि मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने तीन सालों में मात्र 4 लोगों को दंडित किया है जिनमें 3 दंड उच्च न्यायालय के दखल के बाद हुए हैं। यह आंकडे मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग कार्यप्रणाली बताने के लिए पर्याप्त हैं।

केरल से आए हरि कुमार ने जानकारी दी कि केरल सूचना आयोग प्रति माह मात्र 10 मामलों का निपटारा करता है और वहां सेक्शन 4 की कोई व्यवस्था नहीं है। ध्यान देने की बात है कि केरल में यह स्थिति 7 सूचना आयुक्तों के होने के बाद है।

बैठक में यह भी महसूस किया गया कि देश की जनता को इस कानून के प्रति जागरूक बनाने की जरूरत है ताकि इस मुद्दे पर जन समर्थन प्राप्त हो सके। साथ ही विभिन्न राज्यों के सूचना आयोग में बढ़ते लंबित मामलों पर भी चिंता व्यक्त की गई। लोगों ने एकमत में यह स्वीकार किया कि आयोग में मामलों का निपटारा अतिशीध्र होना चाहिए और सूचना देने में देरी करने वाले लोक सूचना अधिकारियों का जुर्माना लगना चाहिए ताकि लोगों का इस कानून में भरोसा बना रहे। अरविंद केजरीवाल ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वह अगले एक साल में अपने-अपने आयोग को सुधारने में ध्यान केंद्रित करें।

सभी कार्यकर्ताओं ने एकतम से माना कि देशभर में आरटीआई बचाओ नाम के अभियान की जरूरत है। इस अभियान में देश में जगह जगह धरने और प्रदर्शन किए जायेंगे, जनता को जागरूक किया जाएगा और आयोग पर ठीक से काम करने का दबाव बनाया जाएगा. इस अभियान को सफल बनाने और आयोग को उत्तरदायी बनाने के लिए कार्यकर्ताओं ने अनेक सुझाव दिए जो निम्नलिखित हैं-
1 अयोग्य सूचना आयुक्तों पर जुर्माना लगना चाहिए
2 आरटीआई को विषय के रूप में छात्रों का पढ़ाया जाना चाहिए
3 सूचनाएं ऑनलाइन हों
4 आरटीआई कार्यकर्ताओं का राष्ट्रीय स्तर का नेटवर्क तैयार हो
5 हस्ताक्षर और एसएमएस अभियान शुरू हो
6 प्रत्येक राज्य में आयोग की कार्यप्रणाली के बारे में अधिक से अधिक चिटि्ठयां राष्ट्रपति को भेजी जाए। पूरे देश में आयोग के गलत निर्णयों के खिलाफ जन सुनवाईयां हों
7 नींद उडाओ अभियान के जरिए लगातार फोन करके आयुक्तों को तंग किया जाए
8 केन्द्रीय समन्वय समिति गठित हो
9 आरटीआई विषय का राजनीतिकरण हो
10 इंगित करो अभियान शुरू हो जिसमें गलत निर्णय देने वाले सूचना आयुक्त को उंगली दिखाई जाए
11 देश के हर जिले में आरटीआई पर कार्यशालाएं और अभियान शुरू हों
12 हर राज्य के राज्यपाल को ज्ञापन भेजा जाए
13 गलत निर्णय देने वाले आयुक्तों को हटाने और अच्छे आयुक्तों को नियुक्त करने का दबाव बनाया जाए
14 घूस को घूंसा अभियान फिर से शुरू हो
15 आयोग के गलत निर्णयों के विरूद्ध ब्लैक फलैग मार्च हो
16 चुनाव घोषणा पत्रों में राजनीतिक दलों को आरटीआई शामिल करने को मजबूर करना चाहिए
17 आरटीआई ग्रीटिंग कार्ड बनें और इन्हें सभी राज्य और केन्द्रीय सूचना आयोग में भेजा जाए
18 राहुल गांधी को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाए
19 आवेदन का शुल्क जमा करने में लचीलापन हो
20 अपीलीय अधिकारी कानून के जानकार हों
21 देश भर में सेक्शन 4 के सम्पूर्ण क्रियान्वयन पर प्रदर्शन हों
22 मीडिया से संबंधित नेशनल बैकअप सपोर्ट विकसित हो
23 हर्जाने की मांग की जानी चाहिए
24 न्यायाधिकरण में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया जाए और जन समर्थन तैयार किया जाये


रविवार, 27 जुलाई 2008

दिल्ली विश्वविद्यालय के लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना

केन्द्रीय सूचना आयोग ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लोक सूचना अधिकारी दीपक वत्स पर नियत समय पर सूचना न देने पर 5750 रूपये का जुर्माना लगाया है। सूचना देने में 23 दिनों की देरी के लिए वत्स पर यह जुर्माना लगा है। उन्होंने पांडव नगर निवासी नीरज कुमार द्वारा मांगी गई सूचनाओं को 30 दिनों के तय समय सीमा के भीतर नहीं दिया था।
नीरज कुमार ने 21 मार्च 2007 में आरटीआई आवेदन के जरिए दिल्ली विश्वविद्यालय के लोक सूचना अधिकारी से डी एस कोठारी होस्टल, पी जी मेन्स और जुबली हाल हास्टल में रहने वाले छात्रों के नाम और उनके कक्ष संख्या की जानकारी मांगी थी। तय 30 दिनों के अंदर आवदेन का जवाब न मिलने पर नीरज ने 16 मई 2007 में केन्द्रीय सूचना आयोग में इसकी षिकायत दर्ज की। सूचना देने में देरी करने के लिए लोक सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।
नोटिस का जवाब देते हुए विश्वविद्यालय के लोक सूचना अधिकारी ने स्पष्टीकरण दिया कि जनवरी और फरवरी 2007 में विश्वविद्यालय के कर्मचारी लंबी हडताल पर थे जिस कारण आवेदक को सूचनाएं समय पर नहीं उपलब्ध कराई जा सकीं। सूचनाधिकारी ने दलील दी कि हडताल से आधिकारिक कार्य में व्यवधान पड़ा और इसके बाद लोक सूचना अधिकारी बीमार पड़ गए और चिकित्सीय अवकाष पर चले गए। सूचना आयोग विष्वविद्यालय के लोक सूचना अधिकारी की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ क्योंकि जिस माह की यह दलीलें हैं आवेदन उसके बाद प्राप्त हुआ था।
मामले की सुनवाई के बाद 14 जुलाई 2008 को सूचना आयुक्त ओ पी केजरीवाल ने विश्वविद्यालय के लोक सूचना अधिकारी व सहायक रजिस्ट्रार दीपक वत्स पर 5750 रूपये का जुर्माना लगाने का आदेष दिया। साथ ही विश्वविद्यालय के उप कुलपति को आयोग के फैसले को सहयोग करने के निर्देष दिए। आयोग ने स्पष्ट किया की जुर्माने की राषि 10 अगस्त 2008 तक आयोग के पास पहुंच जाए।


शनिवार, 26 जुलाई 2008

सांसदों की ख़रीद-फरोख्त के खिलाफ एकजुटता का आवाहन

प्रिय भाइयों,

22 जुलाई 2008 को अपने देश की संसद में हमें एक ऐसा शर्मनाक नजारा देखने को मिला जिसे देखकर लगा कि क्या हमारा देश, उसके सांसद और पूरा का पूरा लोकतंत्र एक मंडी की तरह बनता जा रहा है, जहां नेता खुलेआम बिकते हैं। लेकिन यह तो सच्चाई की एक अंश मात्र ही है। हम सब जानते हैं कि सरकार गिराने और बचाने के नाम पर जो इस संसद के अंदर और बाहर खेला गया वह उससे कहीं ज्यादा है। जितना सामने आया, इसमें सांसदों के अलावा और भी बहुत लोग शामिल हैं। क्या इन लोगों का जुर्म संसद पर हमला करने वाले आतंकवादियों से कम है ? क्या इन पर देशद्रोह का मुकदमा नहीं चलना चाहिए ? लेकिन अब हम क्या करें। यूं ही चुप बैठे रहें ? अगर यूं ही चुप बैठे रहे तो एक दिन यह सांसद हमें और हमारे देश को बेच डालेंगे।आइए हम सब मिलकर जोरदार तरीके से मांग करें कि

१. सरकार बचाने-गिराने के लिए पिछले एक महीनें में जो सांसदों की खरीद फरोख्त हुई, उसकी निष्पक्ष जांच ऐसे लोगों से कराई जाए जिनपर देश को भरोसा हो। दोषी लोगों को जेल भेजा जाए।

२. आईबीएन चैनल ने जो रिकार्डिंग लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी है, उसमें हो रही सांसदों की खरीद-फरोख्त को सभी चैनलों के माध्यम से देश की जनता को दिखाया जाए।

३. भ्रष्ट सांसदों, मंत्रियों, प्रधानमंत्री और अफसरों पर मुकदमा चलाने और जेल भेजने के लिए तुरंत लोकपाल बिल लाकर एक शक्तिशाली एवं निष्पक्ष-स्वतंत्र लोकपाल नियुक्त किया जाए।
सत्ता के गलियारों तक इन मांगों को पहुंचाने के लिए सैक़ड़ों लोग रविवार 27 जुलाई, शाम 6 बजे इंडिया गेट पर एकि़त्रत हो रहे हैं। यह आवाहन किसी संगठन या पार्टी का नहीं, आम लोगों का आम लोगों के नाम है। आपका वहां पहुंचना की आपकी आवाज बनेगा।सभी भाइयों से अनुरोध है कि भारी संख्या में रविवार शाम 6 बजे इंडिया गेट पहुंचकर इस आवाज को बुलंद करें।

गुरुवार, 24 जुलाई 2008

बुन्देलखण्ड के कुलपति को नोटिस जारी

राज्य सूचना आयोग, उत्तर प्रदेश ने दो अलग-अलग मामलों में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय झाँसी के कुलपति को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। आयोग ने अपील का निश्तारण न करने के ख़िलाफ़ कुलपति पर यह कार्यवाही की है।
वादी ठाकुर प्रसाद वैद तथा सूरज बली के दो अलग-अलग मामलों में विश्विद्यालय प्रशासन से सफाई मांगी है. ठाकुर प्रसाद वैद ने कोंच के मथुरा प्रसाद महाविद्यालय की संदान खाते में निहित कृषि भूमि को अवैध रूप से बेच देने के सम्बन्ध में महाविद्यालय से जानकारी मांगी थी। महाविद्यालय के जन सूचना अधिकारी द्वारा सूचना ने देने पर वादी ने प्रथम अपीलीय अधिकारी कुलपति से सूचना प्राप्त करनी चाही. यहाँ से भी सूचना न मिलने पर वादी ने आयोग के सामने अपील की. आयोग ने मामले की गंभीरता को देख कर जन सूचना अधिकारी से निर्धारित समय में सूचना न देने का कारण पूछा और कुलपति से भी मामले के निस्तारण न करने का कारण पूछा. आयोग ने इसे सूचना अधिकार अधिनियम में बाधा पहुचाने का मामला मानते हुए कुलपति को नोटिस जारी कर दंड की चेतावनी दी है.

ई गवरनेंस की ओर एक कदम

यदि कोई आरटीआई आवेदक किसी सरकारी विभाग या मंत्रालय से मांगी गई सूचनाओं से संतुष्ट नहीं है या उसे सूचनाएं नहीं दी गईं हैं तो अब उसे केन्द्रीय सूचना आयोग के दफतरों में भटकने की जरूरत नहीं है। अब वह सीधे सीआईसी में ऑनलाइन द्वितीय अपील या शिकायत कर सकता है। सीआईसी में शिकायत के लिए वेबसाइट http://rti.india.gov.in में दिया गया फार्म भरकर सबमिट पर क्लिक करना होता है। क्लिक करते ही शिकायत या अपील दर्ज हो जाती है।
भारत सरकार ने ई गवरनेंस और शासन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से केन्द्र के सभी मंत्रालयों से संबंधित सूचनाएं अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी थी लेकिन इसके साथ ही अब वेबसाइट के माध्यम से केन्द्रीय सूचना आयोग में शिकायत या द्वितीय अपील भी दर्ज की जा सकती है। इसके अतिरिक्त अपील का स्टेटस भी देखा जा सकता है। सीआईसी में द्वितीय अपील दर्ज कराने के लिए वेबसाइट में प्रोविजनल संख्या पूछी जाती है।
सरकार की इस पहल को सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेयता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सूचनाओं को ऑनलाइन करने के पीछे यह मान्यता है कि देश के सभी नागरिक सरकार को कर देते हैं, इसलिए सभी नागरिकों को समस्त सरकारी विभागों से सूचनाएं प्राप्त करने का अधिकार है।
देश में सूचना का अधिकार आने के बाद लगातार मांग की जा रही थी कि सभी सरकारी सूचनाएं ऑनलाइन होनी चाहिए ताकि नागरिकों को सूचनाएं प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना न करना पडे़। साथ ही आरटीआई आवेदन एवं अपीलों को ऑनलाइन करने की व्यवस्था की भी जरूरत महसूस की गई जिससे सूचना का अधिकार आसानी से लोगों तक अपनी पहुंच बना सके और आवेदक को सूचना प्राप्त करने में ज्यादा मशक्कत न करनी पड़े

मंगलवार, 22 जुलाई 2008

फेल छात्र हुआ प्रथम श्रेणी से पास

बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर प्रखंड के लोहना उत्तरी पंचायत निवासी मलय नाथ मिश्र को परीक्षा में फेल कर दिया गया था, लेकिन आरटीआई के माध्यम से जब इसकी जांच हुई तो वे न केवल उत्तीर्ण हुए बल्कि प्रथम श्रेणी भी हासिल की। दैनिक हिन्दुस्तान के स्थानीय संवाददाता मलय नाथ मिश्र नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता और जनसंचार विषय पर दो साल का स्नाकोत्तर कोर्स कर रहे थे।
उन्होंने दूसरे वर्ष की परीक्षाएं दी थीं। अच्छे परीक्षाफल की आस लगाए बैठे मलय नाथ उस समय आश्चर्य हुआ जब परीक्षा में उन्हें फेल कर दिया गया। विश्वविद्यालय से प्राप्त परीक्षाफल को स्वीकार करने के बजाय उन्होंने दिसंबर 2007 में आरटीआई के माध्यम से नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक के यहां इसे चुनौती दी और विश्वविद्यालय प्रशासन से इस संबंध में जवाब तलब किया।
मलय नाथ मिश्र के आरटीआई आवेदन ने असर दिखाया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आवेदन मिलते ही मामले की जांच की और उसे अपनी भूल का आभास हुआ। जांचोपरांत आवश्यक कारवाई करने के बाद मलय नाथ मिश्र को ६१.२५ प्रतिशत अंक प्राप्त हुए।